Saturday, April 24, 2021

corona bimari h

Kripya sabhi corona ko majak me na le

Saturday, January 2, 2016

odd even day special

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मैं केजरीवाल जी को बहुत मानता हुं लेकिन केजरीवाल सिर्फ 15 दिन में दिल्लीके करोडो लोगो को समझाकर प्रदुषण कम कर सकते है ये मैं भी मान नहीं सकता था !!

अपने सारे चुनावी वादे तो पुरे कीये ही है लेकीन सबसे बडी चुनोतियो को भी मात दी है ! जैसे- भ्रष्टाचार और प्रदुषण !!

���� क्या इन्तेजाम कीये गये ?

��मेट्रोकी 70 ट्रीप बढाई गई !
⏱30550 फ्रीकवन्सी पीक समय के दौरान
�� 3000 एडीशनल बस
��50% महिलाओ के लीये 1000 बसो में रीजर्वेशन/महिला स्पेशल!
��75,000 eरिक्शा तैनात 'पूछो' एप पे !

���� दिनभर क्या हुआ ??
����मंत्री कपिल मिश्रा चले बाइक पे टिफिन के साथ !
���� परिवहन मंत्री गोपाल राय चले बस में !
���� अरविंद केजरीवाल ने कार पुल की आरोग्य मंत्री जैन जी और दुसरे अधिकारी के साथ !
���� मंत्री संदिप कुमार बस से चले
���� विधायक संजीव झा ऑटो में गये !
���� कंई कंपनी ने अपने कर्मचारियो की कार नंबर की लीस्ट और पता शेयर कीया !
���� 13 सालके बच्चे ने ओड इवन की कार का साथी ढुंढनेके लीये वेबसाइट बनाइ !
���� पुलिस और मीडिया ने भी इस बार साथ दीया (THANX)
���� बीजेपी MP सत्यपाल सिंह ने ओड इवन का कानुन तोडा (Shame)
���� बीजेपी के प्रकाश जावडेकर ने तारीफ की ! (THANX)
���� भाजपाके सतीश उपाध्याय ने झूठे आंकडे बताये !
���� एन्वायर मिनिस्टर चले इ-रिक्शा से !!
���� दुनिया की मिडीया ने कवरेज कीया
���� चीन और अमेरीका सहित दुसरे देश की सरकारोने अरविंद जी की तारीफ की !!
���� कई विधायक चले साइकल से !!
���� विधायक चौराहे पे होर्डींग ले कर खडे रहे
���� हजारो वोल्युन्टीयर ने रूल तोडने वालो को गुलाब देकर गांधी गीरी की !
���� प्रदुषण के स्तर में देखी गइ गीरावट !
���� 90% लोगोने सहयोग दीया और मुश्कील काम को सफल बनाया

"डंडा चलानेसे और कार जप्त करनेसे ये नहीं हो सकता था ! इसके लीये लोगो का दिल जीतना पडता है !! सरकार की नियत साफ हो तो जनता साथ देती है ये हमने बहुत बार देखा दिल्लीमें !! जनता चाहे तो क्या नहीं कर सकती ? मुश्कील से मुश्कील काम को भी अंजाम दे सकती है !"
- अरविंद केजरीवाल

बंदे मैं है दम...
वंदे मातरम्...

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Thursday, December 24, 2015

odd even formula

जानिए किन किन वाहनों पर #OddEvenFormula लागु नहीं होगा:

1. CNG से संचालित सभी वाहन
2. इलेक्ट्रिक एवं हाइब्रिड वाहन
3. कोई भी वाहन जिसे अकेली महिला चला रही हो या महिला जिसके साथ 12 वर्ष की उम्र से अधिक के बच्चे न हो
4. दो पहिया वाहन (प्रथम सप्ताह)
5. एम्बुलेंस
6. फायर ब्रिगेड वाहन
7. पुलिस वाहन
8. अस्पताल से सम्बंधित वाहन
9. जेल के वाहन
10. विकलांगो द्वारा चलाये जा रहे वाहन
11. बीमार व्यक्ति को अस्पताल ले जा रहा वाहन
12. उपराज्यपाल का वाहन
13. राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति समेत सभी केंद्रीय मंत्रियो का वाहन
14. दिल्ली के मुख्यमंत्री को छोड़कर अन्य सभी राज्यो के मुख्यमंत्री का वाहन
15. राज्य सभा के डिप्टी चेयरमैन का वाहन
16. सुप्रीम कोर्ट के जज का वाहन
17. संसद में विपक्ष के नेता का वाहन
18. सभी राज्यपालों का वाहन
19. लोकसभा एवं राज्यसभा के स्पीकर एवं डिप्टी स्पीकर का वाहन

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Monday, December 7, 2015

income or job

Agar Ye Logic hai..
To
Dimag ki Ghanti baj jayegi....��������

किसी भी सरकारी विभाग की वेकेंसी निकलती हैं तो उसकी फार्म फीस 500-700 होती ही हैं
सरकार विद्यार्थीयों से पैसा कमाना चाहती हैं या उन्हें रोजगार देना ???

उदाहरण के लिए:-
पोस्ट होती हैं 50 फॉर्म पूरे भारत से भरवाते हैं
फॉर्म फीस होती हैं 500
50 लाख से 80 लाख विद्यार्थी फॉर्म भरते हैं

आइये सरकार का फायदा देखते हैं
500 फॉर्म फीस × 50,00,000 विद्यार्थीयों ने फॉर्म भरें =
(कुल आय फॉर्म फीस से) 2 अरब 50 करोड़

नौकरी देना हैं 50 को
सैलेरी 25000 मान लेते ज्यादा मानी गयी हैं इतनी होती नहीं हैं
25000 × 50 लोग = 12,50,000 महीना
12,50,000 × 12 महीने = 1 करोड़ 50 लाख

चालीस साल की नौकरी करने पर
1,50,00,000 × 40 साल 60 करोड़

सरकार की फॉर्म फीस कुल आय =
2 अरब 50 करोड़
(-) अपॉइटेंड लोगों की 40 साल तक की सैलेरी
60 करोड़

2,50,00,00,000 -60,00,00,000
= 1,90,00,00,000

सरकार की कुल आय = 1 अरब 90 करोड़

मेरा सवाल - सरकार व विभाग से यह हैं कि आप विद्यार्थीयों को नौकरी देना चाहते हैं या
पैसा कमाना चाहते हैं ???
इस संदेश को अपने जान पहचान के लोगों को अवश्य बांटे...।

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Help to needy

AAP .

आप की एक कोशिश इस सर्दी किसी बेघर व्यक्ति की जान बचा सकती है। आओ हम सब मिलकर ये सुनिश्चित करें कि इस सर्दी आश्रय न होने के कारण किसी बेघर व्यक्ति को अपनी जान न गंवानी पड़े।

दिल्ली सरकार ने बेघर लोगों के लिए ठण्ड से बचाव के लिए बड़े पैमाने पर रैन बसेरों का निर्माण किया है। जिससे बेघर लोगों के ठण्ड में बाहर, सडकों पर सोने से होने वाली मौत को रोका जा सके और उन्हें पर्याप्त सुविधा मुहैया कराई जा सके।

बेघर व्यक्तियों की जानकारी देने या किसी अन्य सम्बंधित सहायता के लिए फोन/मेल से कंट्रोल रूम संपर्क किया जा सकता है।                        निवेदक.......विवेक शर्मा
Helpline No. - 23378789 (Landline),
8527898295, 8527898296 (Mobile)
E-Mail: dusibnightshelters@gmail.com

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Sunday, December 6, 2015

Delhi MLA salary increasing matter

दिल्ली के विधायकों की तन्खाह बढ़ोतरी का मामला
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आज कल काफी चर्चा हो रही है दिल्ली के विधायकों की तनखाह में बढ़ोतरी करने की बात को लेकर। वो सही है या गलत, वो आप तय करना, मैं आपके सामने कुछ तथ्य रखता हूँ बस।

हर पांच साल में विधायकों की तनखाह को लेकर एक निष्पक्ष कमेटी बैठाई जाती है जो एक विधायक की ऑफिस की जरूरतों को और बाकी तथ्य जैसे इन्फ्लेशन आदि को ध्यान में रख कर तनखाह की सिफारिश करती है। अब की बार भी ऐसा ही हुआ है। पिछली बार ये कमेटी 2010-11 में बैठाई गयी थी जब बढ़ोतरी हुई थी।

इस कमेटी के चेयरमैन या मेम्बर में से कोई भी सीधे तौर से आम आदमी पार्टी से नहीं जुड़ा हुआ है और ना ही उनमे से किसी को तनखाह बढ़ने से कोई फायदा होगा। उन्होने अभी तनखाह बढाने की सिफारिश की है। तनखाह बढाने के लिए तो अभी काफी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा।

आइये अब समझते हैं के विधायकों की पहले की तनखाह और कमेटी की सिफारिशों के बीच में क्या अंतर है और तनखाह और भत्तों का इस्तेमाल कैसे किया जाता है।

1) बेसिक सैलरी या तनखाह

ये वो रकम होती है जो विधायकों को अपना घर और बच्चों का खर्च करने के लिए मिलती है। अभी ये रकम कुल 12000 है। इस रकम को 50000 करने की सिफारिश की गयी है। साथ में हर साल महंगाई को ध्यान में रखते हुए 10% हर साल बढ़ाने की सिफारिश की गयी है।

ये रकम बढ़ाना 2 कारणों से जरुरी है। एक तो ये के दिल्ली जैसे शहर में 12000 में घर का खर्च कैसे चलता है आप सब जानते हैं। रोज जितने लोग मिलने आते हैं उनकी चाय पानी का खर्च ही कितना हो जाता है बाकी निजी खर्चों की बात क्या है। दूसरा ये के अगर इतनी कम तनखाह मिलेगी तो कौन अपनी मेहनती, इंटेलीजेंट और प्रोफेशनल आदमी अपनी नौकरी और व्यवसाय छोड़ कर राजनीति में आएगा?? और ऐसी हालत में सिर्फ भ्रष्ट और नालायक लोग ही राजनीति में आयेंगे। इंटेलीजेंट लोग इंजिनियर और MBA ही बनेंगे।

2) constituency अलाउंस

ये वो खर्च होता है जो एक विधायक को अपनी constituency में काम करने के लिए मिलता है। ये रकम MLA अपने निजी इस्तेमाल के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकता है। ये रकम छोटे मोटे काम करने के लिए मिलती है। ये पहले 18000 प्रति महिना है जिसे 25000 करने की सिफारिश की गयी है । ये पैसे जनता पर ही खर्च किये जाते हैं विधायक पर नहीं।

3) सेक्रेटरी अलाउंस

ये वो रकम होती है जो MLA को अपने सेक्रेटरी के लिए दी जाती है। हर एक MLA को एक सेक्रेटरी रखना होता है जो विधायक के रोज मर्रा के काम में मदद करता है।

ये रकम सेक्रेटरी को तनखाह के रूप में दी जाती है और इसमें से भी MLA को कुछ नहीं मिलता है। पहले ये रकम 10000 है जिसे बढ़ा कर करने की सिफारिश की गयी है। मतलब सेक्रेटरी की तनखाह बढाने की सिफारिश की गयी है

4) conveyance अलाउंस

ये वो रकम होती है जो विधायक को आने जाने और अपनी constituency में आने जाने के लिए मिलती है। इसमें से भी कुछ विधायक की जेब में नहीं जाता है बल्कि खर्च हो जाता है। पहले ये 6000 रुपये था अब इसे बढ़ा कर 30000 रुपये करने की सिफारिश की गयी है। इसमें कार, टैक्सी का खर्च, ड्राईवर की तनखाह, पेट्रोल/ डीजल का खर्च/ कार की maintainance आदि का खर्च शामिल है। जाहिर है ये रकम भी विधायक बचा नहीं पाता है बल्कि काम करने में खर्च हो जाती है।

5) डेली अलाउंस

ये वो रकम होती है जो विधायक को मिलती है जब वो हाउस का कोई सेशन अटेंड करता है। इसमें आने जाने का खर्च और बाकी खर्चे शामिल होते हैं।

इसे 1000 से 2000 करने की सिफारिश की गयी है

6) कम्युनिकेशन अलाउंस

ये वो रकम है जो विधायक को टेलीफोन मोबाइल इन्टरनेट फैक्स आदि का इस्तेमाल करने के लिए दी जाती है। इसमें ये सभी खर्चे शामिल हैं। ये पहले 8000 थी और अब 10000 करने की सिफारिश की गयी है। जाहिर है ये रकम भी खर्च हो जाती है विधायक की जेब में नहीं जाती

7) ऑफिस रेंटल अलाउंस

कमेटी ने सिफारिश की है के जो विधायक ऑफिस के लिए किराये पर जगह लेते हैं उन्हें 25000 तक की रकम दी जाये। जो विधायक काम के लिए अपने घर या फिर किसी पब्लिक प्रॉपर्टी का इस्तेमाल करते हैं उन्हें ये अलाउंस नहीं मिलेगा

8) DTP ऑपरेटर अलाउंस

विधायक जो भी काम करता है उसकी पूरी एंट्री और डाटा एंट्री और सभी रिपोर्ट्स तय्यार करना और सब ऑफिस के कार्य के लिए 30000 रुपये दिए जाते थे जो 2 कंप्यूटर ऑपरेटर को तनखाह के रूप में दिए जाते थे। मतलब ये विधायक की तनखाह नहीं कंप्यूटर ऑपरेटर की तनखाह होती है।

इसे बढ़ा कर 70000 करने की सिफारिश की गयी है। जिसमे 30000 कंप्यूटर ऑपरेटर, 30000 रेसेअर्चेर, और 10000 ऑफिस attendent की तनखाह होगी। इसमें से विधायक को कुछ नही बचेगा।

ये सब तथ्य मैंने आपके सामने रखे । अब आप खुद फैसला कीजिये के क्या सही है क्या गलत।

वैसे असाम में पहले ही तनखाह 60000 रुपये प्रति महिना है। तो ये कहना के दिल्ली में तनखाह सबसे ज्यादा है वो एक दम गलत है।

दूसरी बात ये के ये तनखाह बढ़ना सभी
राज्यों में होगा। ये लगभग तय है। किसी राज्य में पहले तो किसी में बाद में होगा।

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Delhi Lokpal bill

जितना बड़ा पद उतनी बड़ी सजा - जनलोकपाल बिल को आप सबको जानने के लिए:-
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आम आदमी पार्टी (आप) के सबसे बड़े वायदे दिल्ली जनलोकपाल बिल-2015 को दिल्ली विधानसभा में मंजूरी दे दी गई। आखिर इस बिल को लेकर क्यों हायतौबा मची है, क्यों राजनेता इससे विचलित हो रहे है। एक जिज्ञासा पैदा होती है कि क्या है पूरा जन लोकपाल बिल । कैसे होगा इसका गठन। इसकी जद में कौन-कौन लोग शामिल होंगे । क्या हैं सजा के प्रावधान। इन्हीं बिंदुओं से परत उठाती ये रिपोर्ट ।

"बिल में संशोधन भी किया गया है":-*****************************

सात सदस्य करेंगे लोकपाल की नियुक्ति:-******************************
दिल्ली जनलोकपाल बिल- 2015 के अनुसार, नियुक्ति कमेटी में चार के बजाय सात सदस्यों को शामिल किया जाएगा। अब दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के अलावा दिल्ली के मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और सदन में विपक्ष के नेता के अलावा एक प्रबुद्ध नागरिक, दिल्ली हाईकोर्ट के जज और लोकपाल के पूर्व अध्यक्ष को शामिल किया जाएगा। इन सदस्यों पर एक शर्त भी रखी गई है।

हटाने की प्रक्रिया:-********************
अब दिल्ली विधानसभा से दो तिहाई बहुमत से पास होने के बावजूद मामले पर अंतिम मुहर दिल्ली हाईकोर्ट लगाएगी। पहले जजों को हटाने की प्रक्रिया के तहत ही लोकपाल को हटाने की प्रक्रिया शामिल की गई थी।

तीन सदस्यीय होगा दिल्ली जनलोकपाल
दिल्ली जनलोकपाल में तीन सदस्य होंगे। एक अध्यक्ष और दो अन्य सदस्य।

भ्रष्टाचार की जांच की समय सीमा:-********************-****

भ्रष्टाचार से संबंधित किसी भी मामले की जांच की समय सीमा अधिकतम 6 महीने निर्धारित की गई है। हालांकि, कुछ दुर्लभतम मामलों में यह प्रक्रिया 12 महीने तक चल सकती है।

सजा की प्रक्रिया:-****************-*-
किसी भी मामले की जांच के बाद सजा सुनाने की प्रक्रिया छह महीने में पूरा करना अनिवार्य होगा।

ऐसे होगी जांच:-*****************
किसी भी मामले की लोकपाल खुद संज्ञान लेते हुए जांच का निर्देश दे सकता है। इसके अलावा वह किसी व्यक्ति या अधिकारी की शिकायत पर भी जांच का आदेश जारी कर सकता है। लोकपाल किसी अन्य अधिकारी से भी जांच कराने के लिए स्वतंत्र होगा।

उम्र कैद का भी प्रावधान है:-*********************--
भ्रष्टाचार के गंभीर मामले में दोषी व्यक्ति को आजीवन करावास सुनाई जा सकती है। हालांकि, सजा का सामान्य प्रावधान 6 महीने से 10 साल तक होगा। इसके अलावा रिश्वत से प्राप्त धनराशि का पांच गुना जुर्माना वसूला जाएगा। रिश्वत की धनराशि से खरीदी गई संपत्ति को भी जब्त किया जाएगा। इसके अलावा अधिकारी को निलंबित अथवा उसका तबादला भी किया जा सकता है।

ऊंचे पद पर बैठे व्यक्ति को होगी ज्यादा सजा:-***********************
बिल में उल्लेख किया गया है कि किसी वरिष्ठ पद पर बैठे व्यक्ति को ज्यादा सजा सुनाई जाएगी अर्थात जो व्यक्ति जितने ऊंचे ओहदे पर बैठा होगा, उसे उतनी ज्यादा सजा मिलेगी। प्रत्येक अधिकारी को सलाना संपत्ति का रिकॉर्ड बताना होगा अन्यथा अगले महीने का वेतन उसे नहीं मिलेगा।

शिकायतकर्ता को मिलेगी सुरक्षा:-***********************-
भ्रष्टाचार से संबंधित किसी भी मामले में यदि शिकायतकत्र्ता को जानमाल का खतरा होगा तो उसे सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। साथ ही प्रशासनिक सुरक्षा भी दी जाएगी। यदि शिकायतकर्ता अपनी पहचान छुपाना चाहता है तो उसकी इस मांग को भी पूरा किया जाएगा। हालांकि, गलत शिकायत करने वालों के लिए भी सजा का प्रावधान किया गया है। शिकायतकर्ता को सुरक्षा देने की जिम्मेवारी लोकपाल की होगी।

"पटल से संशोधन तक"....**********************
चार दिन पहले इसे उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की ओर से सदन में प्रस्तुत किया गया था। बिल पर सदन में शुक्रवार को लंबी बहस चली। इसमें 30 विधायकों ने अपनी बात रखी।
अन्ना हजारे जी की भावना का ख्याल व केजरीवाल जी की चेतावनी:-*****************************

समाज सेवी अन्ना हजारे के सुझाव पर शुक्रवार को बिल में संशोधन करते हुए फिर से सदन पटल पर लाया गया। सदन में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चेतावनी भी दी कि यदि इसे केंद्र से मंजूरी नहीं दी गई तो वह टेढ़ी उंगली का इस्तेमाल करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि अब लोकपाल की नियुक्ति कमेटी में चार सदस्यों के बजाय सात सदस्यों को शामिल किया जाएगा। इसी तरह उन्हें हटाने के लिए भी जज की तर्ज पर हटाने की प्रक्रिया के साथ ही दिल्ली हाईकोर्ट को भी शामिल किया जाएगा। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भ्रष्टाचार के मामले में किसी भी अधिकारी और नेता के खिलाफ कार्रवाई हो सकेगी। केंद्रीय मंत्री और केंद्र सरकार के अधिकारी भी इस जद में होंगे।
                       -ठाकुर देवेन्द्र सिंह

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