Sunday, December 6, 2015

Delhi Lokpal bill

जितना बड़ा पद उतनी बड़ी सजा - जनलोकपाल बिल को आप सबको जानने के लिए:-
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आम आदमी पार्टी (आप) के सबसे बड़े वायदे दिल्ली जनलोकपाल बिल-2015 को दिल्ली विधानसभा में मंजूरी दे दी गई। आखिर इस बिल को लेकर क्यों हायतौबा मची है, क्यों राजनेता इससे विचलित हो रहे है। एक जिज्ञासा पैदा होती है कि क्या है पूरा जन लोकपाल बिल । कैसे होगा इसका गठन। इसकी जद में कौन-कौन लोग शामिल होंगे । क्या हैं सजा के प्रावधान। इन्हीं बिंदुओं से परत उठाती ये रिपोर्ट ।

"बिल में संशोधन भी किया गया है":-*****************************

सात सदस्य करेंगे लोकपाल की नियुक्ति:-******************************
दिल्ली जनलोकपाल बिल- 2015 के अनुसार, नियुक्ति कमेटी में चार के बजाय सात सदस्यों को शामिल किया जाएगा। अब दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के अलावा दिल्ली के मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और सदन में विपक्ष के नेता के अलावा एक प्रबुद्ध नागरिक, दिल्ली हाईकोर्ट के जज और लोकपाल के पूर्व अध्यक्ष को शामिल किया जाएगा। इन सदस्यों पर एक शर्त भी रखी गई है।

हटाने की प्रक्रिया:-********************
अब दिल्ली विधानसभा से दो तिहाई बहुमत से पास होने के बावजूद मामले पर अंतिम मुहर दिल्ली हाईकोर्ट लगाएगी। पहले जजों को हटाने की प्रक्रिया के तहत ही लोकपाल को हटाने की प्रक्रिया शामिल की गई थी।

तीन सदस्यीय होगा दिल्ली जनलोकपाल
दिल्ली जनलोकपाल में तीन सदस्य होंगे। एक अध्यक्ष और दो अन्य सदस्य।

भ्रष्टाचार की जांच की समय सीमा:-********************-****

भ्रष्टाचार से संबंधित किसी भी मामले की जांच की समय सीमा अधिकतम 6 महीने निर्धारित की गई है। हालांकि, कुछ दुर्लभतम मामलों में यह प्रक्रिया 12 महीने तक चल सकती है।

सजा की प्रक्रिया:-****************-*-
किसी भी मामले की जांच के बाद सजा सुनाने की प्रक्रिया छह महीने में पूरा करना अनिवार्य होगा।

ऐसे होगी जांच:-*****************
किसी भी मामले की लोकपाल खुद संज्ञान लेते हुए जांच का निर्देश दे सकता है। इसके अलावा वह किसी व्यक्ति या अधिकारी की शिकायत पर भी जांच का आदेश जारी कर सकता है। लोकपाल किसी अन्य अधिकारी से भी जांच कराने के लिए स्वतंत्र होगा।

उम्र कैद का भी प्रावधान है:-*********************--
भ्रष्टाचार के गंभीर मामले में दोषी व्यक्ति को आजीवन करावास सुनाई जा सकती है। हालांकि, सजा का सामान्य प्रावधान 6 महीने से 10 साल तक होगा। इसके अलावा रिश्वत से प्राप्त धनराशि का पांच गुना जुर्माना वसूला जाएगा। रिश्वत की धनराशि से खरीदी गई संपत्ति को भी जब्त किया जाएगा। इसके अलावा अधिकारी को निलंबित अथवा उसका तबादला भी किया जा सकता है।

ऊंचे पद पर बैठे व्यक्ति को होगी ज्यादा सजा:-***********************
बिल में उल्लेख किया गया है कि किसी वरिष्ठ पद पर बैठे व्यक्ति को ज्यादा सजा सुनाई जाएगी अर्थात जो व्यक्ति जितने ऊंचे ओहदे पर बैठा होगा, उसे उतनी ज्यादा सजा मिलेगी। प्रत्येक अधिकारी को सलाना संपत्ति का रिकॉर्ड बताना होगा अन्यथा अगले महीने का वेतन उसे नहीं मिलेगा।

शिकायतकर्ता को मिलेगी सुरक्षा:-***********************-
भ्रष्टाचार से संबंधित किसी भी मामले में यदि शिकायतकत्र्ता को जानमाल का खतरा होगा तो उसे सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। साथ ही प्रशासनिक सुरक्षा भी दी जाएगी। यदि शिकायतकर्ता अपनी पहचान छुपाना चाहता है तो उसकी इस मांग को भी पूरा किया जाएगा। हालांकि, गलत शिकायत करने वालों के लिए भी सजा का प्रावधान किया गया है। शिकायतकर्ता को सुरक्षा देने की जिम्मेवारी लोकपाल की होगी।

"पटल से संशोधन तक"....**********************
चार दिन पहले इसे उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की ओर से सदन में प्रस्तुत किया गया था। बिल पर सदन में शुक्रवार को लंबी बहस चली। इसमें 30 विधायकों ने अपनी बात रखी।
अन्ना हजारे जी की भावना का ख्याल व केजरीवाल जी की चेतावनी:-*****************************

समाज सेवी अन्ना हजारे के सुझाव पर शुक्रवार को बिल में संशोधन करते हुए फिर से सदन पटल पर लाया गया। सदन में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चेतावनी भी दी कि यदि इसे केंद्र से मंजूरी नहीं दी गई तो वह टेढ़ी उंगली का इस्तेमाल करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि अब लोकपाल की नियुक्ति कमेटी में चार सदस्यों के बजाय सात सदस्यों को शामिल किया जाएगा। इसी तरह उन्हें हटाने के लिए भी जज की तर्ज पर हटाने की प्रक्रिया के साथ ही दिल्ली हाईकोर्ट को भी शामिल किया जाएगा। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भ्रष्टाचार के मामले में किसी भी अधिकारी और नेता के खिलाफ कार्रवाई हो सकेगी। केंद्रीय मंत्री और केंद्र सरकार के अधिकारी भी इस जद में होंगे।
                       -ठाकुर देवेन्द्र सिंह

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