Delhi MLA salary increasing matter
दिल्ली के विधायकों की तन्खाह बढ़ोतरी का मामला
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आज कल काफी चर्चा हो रही है दिल्ली के विधायकों की तनखाह में बढ़ोतरी करने की बात को लेकर। वो सही है या गलत, वो आप तय करना, मैं आपके सामने कुछ तथ्य रखता हूँ बस।
हर पांच साल में विधायकों की तनखाह को लेकर एक निष्पक्ष कमेटी बैठाई जाती है जो एक विधायक की ऑफिस की जरूरतों को और बाकी तथ्य जैसे इन्फ्लेशन आदि को ध्यान में रख कर तनखाह की सिफारिश करती है। अब की बार भी ऐसा ही हुआ है। पिछली बार ये कमेटी 2010-11 में बैठाई गयी थी जब बढ़ोतरी हुई थी।
इस कमेटी के चेयरमैन या मेम्बर में से कोई भी सीधे तौर से आम आदमी पार्टी से नहीं जुड़ा हुआ है और ना ही उनमे से किसी को तनखाह बढ़ने से कोई फायदा होगा। उन्होने अभी तनखाह बढाने की सिफारिश की है। तनखाह बढाने के लिए तो अभी काफी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा।
आइये अब समझते हैं के विधायकों की पहले की तनखाह और कमेटी की सिफारिशों के बीच में क्या अंतर है और तनखाह और भत्तों का इस्तेमाल कैसे किया जाता है।
1) बेसिक सैलरी या तनखाह
ये वो रकम होती है जो विधायकों को अपना घर और बच्चों का खर्च करने के लिए मिलती है। अभी ये रकम कुल 12000 है। इस रकम को 50000 करने की सिफारिश की गयी है। साथ में हर साल महंगाई को ध्यान में रखते हुए 10% हर साल बढ़ाने की सिफारिश की गयी है।
ये रकम बढ़ाना 2 कारणों से जरुरी है। एक तो ये के दिल्ली जैसे शहर में 12000 में घर का खर्च कैसे चलता है आप सब जानते हैं। रोज जितने लोग मिलने आते हैं उनकी चाय पानी का खर्च ही कितना हो जाता है बाकी निजी खर्चों की बात क्या है। दूसरा ये के अगर इतनी कम तनखाह मिलेगी तो कौन अपनी मेहनती, इंटेलीजेंट और प्रोफेशनल आदमी अपनी नौकरी और व्यवसाय छोड़ कर राजनीति में आएगा?? और ऐसी हालत में सिर्फ भ्रष्ट और नालायक लोग ही राजनीति में आयेंगे। इंटेलीजेंट लोग इंजिनियर और MBA ही बनेंगे।
2) constituency अलाउंस
ये वो खर्च होता है जो एक विधायक को अपनी constituency में काम करने के लिए मिलता है। ये रकम MLA अपने निजी इस्तेमाल के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकता है। ये रकम छोटे मोटे काम करने के लिए मिलती है। ये पहले 18000 प्रति महिना है जिसे 25000 करने की सिफारिश की गयी है । ये पैसे जनता पर ही खर्च किये जाते हैं विधायक पर नहीं।
3) सेक्रेटरी अलाउंस
ये वो रकम होती है जो MLA को अपने सेक्रेटरी के लिए दी जाती है। हर एक MLA को एक सेक्रेटरी रखना होता है जो विधायक के रोज मर्रा के काम में मदद करता है।
ये रकम सेक्रेटरी को तनखाह के रूप में दी जाती है और इसमें से भी MLA को कुछ नहीं मिलता है। पहले ये रकम 10000 है जिसे बढ़ा कर करने की सिफारिश की गयी है। मतलब सेक्रेटरी की तनखाह बढाने की सिफारिश की गयी है
4) conveyance अलाउंस
ये वो रकम होती है जो विधायक को आने जाने और अपनी constituency में आने जाने के लिए मिलती है। इसमें से भी कुछ विधायक की जेब में नहीं जाता है बल्कि खर्च हो जाता है। पहले ये 6000 रुपये था अब इसे बढ़ा कर 30000 रुपये करने की सिफारिश की गयी है। इसमें कार, टैक्सी का खर्च, ड्राईवर की तनखाह, पेट्रोल/ डीजल का खर्च/ कार की maintainance आदि का खर्च शामिल है। जाहिर है ये रकम भी विधायक बचा नहीं पाता है बल्कि काम करने में खर्च हो जाती है।
5) डेली अलाउंस
ये वो रकम होती है जो विधायक को मिलती है जब वो हाउस का कोई सेशन अटेंड करता है। इसमें आने जाने का खर्च और बाकी खर्चे शामिल होते हैं।
इसे 1000 से 2000 करने की सिफारिश की गयी है
6) कम्युनिकेशन अलाउंस
ये वो रकम है जो विधायक को टेलीफोन मोबाइल इन्टरनेट फैक्स आदि का इस्तेमाल करने के लिए दी जाती है। इसमें ये सभी खर्चे शामिल हैं। ये पहले 8000 थी और अब 10000 करने की सिफारिश की गयी है। जाहिर है ये रकम भी खर्च हो जाती है विधायक की जेब में नहीं जाती
7) ऑफिस रेंटल अलाउंस
कमेटी ने सिफारिश की है के जो विधायक ऑफिस के लिए किराये पर जगह लेते हैं उन्हें 25000 तक की रकम दी जाये। जो विधायक काम के लिए अपने घर या फिर किसी पब्लिक प्रॉपर्टी का इस्तेमाल करते हैं उन्हें ये अलाउंस नहीं मिलेगा
8) DTP ऑपरेटर अलाउंस
विधायक जो भी काम करता है उसकी पूरी एंट्री और डाटा एंट्री और सभी रिपोर्ट्स तय्यार करना और सब ऑफिस के कार्य के लिए 30000 रुपये दिए जाते थे जो 2 कंप्यूटर ऑपरेटर को तनखाह के रूप में दिए जाते थे। मतलब ये विधायक की तनखाह नहीं कंप्यूटर ऑपरेटर की तनखाह होती है।
इसे बढ़ा कर 70000 करने की सिफारिश की गयी है। जिसमे 30000 कंप्यूटर ऑपरेटर, 30000 रेसेअर्चेर, और 10000 ऑफिस attendent की तनखाह होगी। इसमें से विधायक को कुछ नही बचेगा।
ये सब तथ्य मैंने आपके सामने रखे । अब आप खुद फैसला कीजिये के क्या सही है क्या गलत।
वैसे असाम में पहले ही तनखाह 60000 रुपये प्रति महिना है। तो ये कहना के दिल्ली में तनखाह सबसे ज्यादा है वो एक दम गलत है।
दूसरी बात ये के ये तनखाह बढ़ना सभी
राज्यों में होगा। ये लगभग तय है। किसी राज्य में पहले तो किसी में बाद में होगा।
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