Jago
हे सूरवीर , हे कर्मवीर, हे "आप" के वीर सपूत सुनो।
रणभेरी की आहट है, फिर अपनी कमरें कसना है।
कुछ पल के परिश्रम से जाने, कितने जीवन हँसना है।।
इस सत्यप्रेम के महायज्ञ में, आहुति बनकर जलना है।
सेवा, संकल्प, समर्पण से, लिखे इतिहास बदलना है।।
नही पता पैसों की आँधी , किन वेगों से आयेगी।
नही पता बदरंग मीडिया,क्या क्या स्वाँग रचायेगी।।
तन्त्र सभी षड्यंत्र सभी, सब हथकंडे अपनायेगी।
नही पता सत्ता पाने, सत्ती कितना गिर जायेगी।।
इसलिए सुनो हे वीर तुम्हें, इतनी तैयारी करना है।
चाहे आंधी हो पैसों की, या भ्रष्ट मीडिया हावी हो, अपने पौरूष की ताकत से , इस सागर के पार उतरना है।
हो चित्त पट्ट दोनो मे जय कुछ ऐसी कुश्ती लड़ना है।।
Labels: aby, aby jhaduwala, aby natakwala, motivation, poetry

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