Dilli chalo
दादा 1930 की दांडी यात्रा में सिर्फ 50 कदम तक ही क्यों ना चला हो ?
फिर भी उसके पोते और परपोते आज छाती फुलाके कहते है...
की पता है ? मेरे दादा तो सत्याग्रही थे, क्रांतिकारी थे...
तो सोचो मेरे देशप्रेमी दोस्तों,
जब आपके पोते पोती अपने दोस्तों से बात करेंगे तो कितना गर्व महसूस करेंगे...
इसलिए जल्द से जल्द अपना सामान बांध लो और ट्रेन पकड़के... चलो दिल्ली....
भारत माँ के बेटे हो ?
फिर घर में क्यों बैठे हो ?
- आपका सेवक,
राकेश हिरपरा
Twitter.com/RakeshHirpara
Labels: aam aadmi party, aap, aap kejrival, aby, aby jhaduwala, aby natakwala, delhi campaign

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