Thursday, December 25, 2014

Dilli chalo

��दादा 1930 की दांडी यात्रा में सिर्फ 50 कदम तक ही क्यों ना चला हो ?
फिर भी उसके पोते और परपोते आज छाती फुलाके कहते है...
 
की पता है ? मेरे दादा तो सत्याग्रही थे, क्रांतिकारी थे...
 
��तो सोचो मेरे देशप्रेमी दोस्तों,
 
जब आपके पोते पोती अपने दोस्तों से बात करेंगे तो कितना गर्व महसूस करेंगे...
 
��इसलिए जल्द से जल्द अपना सामान बांध लो और ट्रेन पकड़के... चलो दिल्ली....
 

भारत माँ के बेटे हो ?
फिर घर में क्यों बैठे हो ?
 

- आपका सेवक,
राकेश हिरपरा
Twitter.com/RakeshHirpara

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