Saturday, April 4, 2015

Good news for delhi patients

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��rvind ��ejriwal
On work��

✅निजी अस्‍पतालों पर अब ऐसे नकेल कसेंगे केजरीवाल ✅

�� केजरीवाल ��

सरकार जल्द ही दिल्ली में क्लीनिकल इस्टैबलिशमेंट एक्ट लागू करने जा रही है। इसका मतलब ये है कि अब दिल्ली में इलाज कराने में आने वाला खर्च बेहिसाब नहीं होगा। यहां तक कि एक डॉक्टर वाले क्लीनिक से लेकर सैकड़ों बेड वाले अस्पताल सभी तय मापदंड के मुताबिक ही पैसे वसूल सकेंगे और सुविधा मुहैया कराएंगे।����

����दिल्ली के निजी अस्पतालों में इलाज कराने वालों के लिए अच्छी खबर ये है कि केजरीवाल सरकार ने निजी क्लीनिक और अस्पतालों पर नकेल कसने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए केजरीवाल सरकार दिल्ली में क्लीनिकल एस्टाब्लिशमेंट एक्ट लागू करने वाली है। इस कानून के लागू होने के बाद निजी अस्पतालों में हर तरह के इलाज से लेकर पैथोलॉजिकल और मेडिकल जांच तक की अधिकतम फीस तय होगी। इस कानून के तहत अधिकारी किसी अस्पताल, क्लीनिक और पैथलैब की जांच कर सकेंगे।����

����मरीजों को गैर-जरूरी जांच और इलाज पर जुर्माना कर सकेंगे और लाइसेंस तक रद्द कर सकेंगे। इस कानून के तहत बड़े से छोटे तक सभी अस्पताल, क्लीनिक, पैथलैब और जांच केंद्रों का रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा।����

���� अस्पताल, क्लीनिक और पैथलैब की न्यूनतम जरूरत और कर्मचारियों की संख्या भी तय मापदंड के मुताबिक होगी। हालांकि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन जैसी संस्थाएं इस कानून को लागू करने के विरोध में हैं।����

����डॉक्टरों का कहना है कि इस कानून को लागू करने से पहले सरकार को इलाज से जुड़े हर क्षेत्र के विशेषज्ञों की कमेटी बनाकर उससे राय लेनी चाहिए क्योंकि अगर ये कानून लागू हो गया और इसके मुताबिक कार्रवाई का हक ऐसे लोगों को मिला जिन्हें मेडिकल फील्ड की जानकारी नहीं है तो डॉक्टरों के साथ बड़ा अन्याय होगा। डॉक्टरों के अलावा पैथोलॉजी सेंटर चलाने वाले भी इस कानून का विरोध कर रहे हैं।♈️

������आपको बता दें कि दिल्ली में अभी 1953 का दिल्ली नर्सिंग होम रजिस्ट्रेशन एक्ट काम कर रहा है जिसकी आड़ में निजी अस्पताल और क्लीनिक मरीजों से मनमानी वसूली कर रहे हैं। इसी कानून की जगह क्लीनिकल एस्टाब्लिशमेंट एक्ट केंद्र सरकार ने पांच साल पहले बनाया था और तीन साल पहले इसकी अधिसूचना भी जारी हो चुकी थी लेकिन दिल्ली के मुनाफाखोर अस्पताल और क्लीनिक चलाने वालों के दबाव में ये कानून दिल्ली में लागू नहीं हुआ था।������

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