Monday, November 3, 2014

Delhi trilokpiri

दोस्तों हूँ तो मैं एक अदना सा भारतीय पर मेरे विचार एक बार जरुर पढ़ना।

मैं त्रिलोकपुरी दिल्ली में रहता हूँ। मैं कई महीनो से वट्सएप पर कट्टर विचारों के बारे में कई सारे मेसेज पढ़ा करता था। और इसीकारण मैं भी ऐसा ही सोचने लगा । लोकसभा के चुनावों में भी मैंने जातिवाद और धर्म ले नाम पर दंगे भड़काने वाली पार्टी के लिए काम किया और खुद भी वोट किया। मैं सोचता था के एक ख़ास धर्म के लोगों को काबू में करने के लिए दंगे करना बिलकुल वाजिब है क्यूंकि उनको डर से ही काबू किया जा सकता है। और ऐसी ही कितनी बातें मेरे दिमाग में घर कर गयी थी। इसी बारे में मेरी अपने कई रिश्तेदारों और दोस्तों से बहस भी हुआ करती थी।

कुछ दिन पहले मेरे घर के पास भी दंगे हुए। दंगाइयों ने खूब हंगामा किया। मैंने पहली बार अपनी आँखों से दंगो का सच देखा। सड़क पर खून बिखरा पड़ा था। पत्थर बरसाए जा रहे थे। दंगाइए हाथों में नंगी तलवारें और लाठियां लेकर चिल्लाते हुए इधर उधर अफरा तफरी मचा रहे थे। मैं उस वक्त किसी दोस्त के पास गया हुआ था। मैं बहोत खुश हुआ के आज उस धर्म के लोगों को अच्छा सबक मिलेगा। जब शोर थोडा शांत हुआ तो मैं छुप कर अपने घर पहुंचा।

जैसे ही घर पहुंचा मेरे होश उड़ गए। खिडकियों के शीशे टूटे हुए थे। और देहलीज पर खून लगा हुआ था। मेरी धड़कन तेज हो गयी और मैं कांपते कांपते अन्दर गया। जैसे ही अन्दर गया तो देखा के मेरे पिता जी बेड पर लेटे हुए थे और उनके माथे और कान से खून बह रहा था। साथ ही मेरी बहन कुर्सी पर बैठी थी और उसके होठों से खून बह रहा था वो बहोत जोर जोर के रो रही थी।

माँ जो पिताजी की चोट पर डेटोल लगा रही थी उस से मैंने पूछा के ये सब कैसे हुआ? माँ बोली के जब पिताजी मेरी बहिन के साथ चाचा जी के घर से वापिस आ रहे  थे तब दंगा शुरू हो गया। भीड़ ने पिता जी के साथ मारपीट की और बहिन के साथ बदतमीजी की जिस कारण उनका ये हाल हुआ।

मेरे पैरों के तले से ज़मीन खिसक गयी।  और मेरी आँखें खुल गयी। मुझे समझ आ गया के दंगा कभी भी अच्छा नहीं हो सकता। दंगा हमेशा ही दुःख और आंसू लेकर आता है।

मैंने इतनी बड़ी पोस्ट अपने उन सभी रिश्तेदारों और दोस्तों से माफ़ी मांगने के लिए लिखी है जिनके साथ कभी मेरी बहस हुई है और कभी न कभी मैंने इस मुद्दे पर उनका दिल दुखाया है।  मैं आप सबसे माफ़ी मांगता हूँ और वादा करता हूँ के आगे से कभी भी हिंसा को सही नहीं ठहराऊंगा।

आपसे प्राथना है के मेरे इस मेसेज को सभी जगह शेयर करें तांकि मेरे दोस्त मुझे माफ़ कर सकें

आपका
अजय

Labels: , ,

0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home