Delhi election news
चुनाव को लेकर बीजेपी अपनी रणनीति में हुई कामयाब
बीजेपी चुनाव कराने के लिए जिस मौके की तलाश में थी वह उस रणनीति में कामयाब हो गई है।
बीजेपी चाहती थी कि दिल्ली के चुनाव झारखंड और जम्मू कश्मीर के साथ न हों।
☎️☎️चूंकि अभी विधानसभा को भंग करने के नोटिफिकेशन में टाइम लग सकता है लिहाजा दिल्ली के चुनाव इन दोनों राज्यों के साथ नहीं होंगे। दिल्ली के चुनाव अगर अलग से होंगे तो पीएम नरेंद्र मोदी का पूरा फोकस दिल्ली पर होगा और दिल्लीवालों पर मोदी को मैजिक चलाया जा सकेगा। बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने यह रणनीति बनाई थी और वह सफल रही।♈️
बीजेपी ने कहा, नहीं बनानी सरकार: बीजेपी इस बात से भी उत्साहित है कि बीजेपी को हरियाणा में जबरदस्त सफलता मिली है। हरियाणा के चुनाव का सीधा असर दिल्ली की सीटों पर भी पड़ता है। सूत्रों के मुताबिक यह भी बात निकलकर सामने आई है कि बीजेपी ने उप चुनावों की तीनों सीटों पर एक सर्वे भी कराया है यह सर्वे पार्टी के मुताबिक नहीं है। बीजेपी को इस बात का भी डर था कि उप चुनावों में पीएम नरेंद्र मोदी नहीं आ पाएंगे। उधर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी इन उप चुनावों के लिए करो या मरो की स्थिति में थी। अगर एक भी सीट बीजेपी के हाथ से निकलती तो बीजेपी का उत्साह गिर सकता था। इसलिए बीजेपी ने एलजी को सबसे पहले जाकर अपने रूख से अवगत कराया कि उनकी मंशा सरकार बनाने की नहीं है। बीजेपी के बाद ही कांग्रेस ओर आम आदमी पार्टी ने भी एलजी को साफ कर दिया कि वे चुनाव चाहते हैं।
कैसे भंग होगी विधानसभा: अब दिल्ली के एलजी एक रिपोर्ट बनाकर होम मिनिस्ट्री को भेजेंगे। रिपोर्ट में यह बात लिखी होगी कि दिल्ली में तीनों पार्टियां सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है। इसके बाद होम मिनिस्ट्री यह रिपोर्ट एक नोटिफिकेशन के साथ राष्ट्रपति को भेजेगी। नोटिफिकेशन में विधानसभा को भंग करने की बात होगी। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह नोटिफिकेशन गजट में पब्लिश किया जाएगा। नोटिफिकेशन की एक कॉपी विधानसभा को भेजी जाएगी। विधानसभा सभी विधायकों को इसकी कापी भेजेगी ताकि उन्हें पता चल सके के विधानसभा भंग हो गई है।
⛅️⛅️⛅️15 फरवरी तक है राष्ट्रपति शासन: विधानसभा भंग करने के बाद चुनाव कराने के लिए 6 महीने का वक्त होता है। दिल्ली में 15 फरवरी तक राष्ट्रपति शासन है लिहाजा बीजेपी कोशिश करेगी कि दिल्ली विधानसभा का चुनाव जनवरी के मध्य या फरवरी के पहले सप्ताह में कराया जाए। यह निर्णय केंद्र सरकार और चुनाव आयोग ने लेना है। संविधान विशेषज्ञ और दिल्ली विधानसभा के पूर्व सेक्रेटरी एस.के. शर्मा के मुताबिक जन प्रतिनिधि कानून के तहत चुनाव कराने के लिए कम से कम 30 दिन का समय दिया जाता है। इस समय में से 7 दिन नोमिनेशन के लिए होते हैं, 1 दिन नोमिनेशन की जांच के लिए होता है, 14 दिन चुनाव प्रचार के लिए दिए जाते हैं। इसमें कुछ गजेटिड होली डे को भी शामिल किया जाता है♈️
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